हर साल की भांति इस वर्ष भी चैती मेले में पर्वतीय उत्पाद,पर्वतीय खाद्य उत्पाद ग्राहकों को कर रहे आकर्षित…

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काशीपुर-(सुनील शर्मा) प्रसिद्ध चैती मेला अपने चरम पर है। चैती मेले में जहां देश के विभिन्न राज्यों से विभिन्न उत्पादों की दुकान दुकानदार लेकर आए हुए हैं तो वही इस मेले में उत्तराखंड की कुमाऊं तथा गढ़वाल के प्रोडक्ट की अनुपम छटा बिखेरती एक दुकान हथकरघा प्रदर्शनी में तराई के लोगों को अपनी ओर खासा आकर्षित कर रही हैं। इस दुकान पर काफी पर्वतीय खाद्य उत्पाद देखने को मिल रहे हैं जो ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। काशीपुर में इस समय चल रहे चैती मेले में जहां पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली राजस्थान और पंजाब के खाद्य पदार्थों की दुकानें तथा अन्य खेल तमाशा, बच्चों के खेलकूद के सामान तथा अन्य घरेलू उपयोग में आने वाले सामानों की दुकाने  जहां लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं

 

तो वही इस चैती मेले में लगी हथकरघा प्रदर्शनी में कुमाऊं नमकीन उद्योग पिथौरागढ़ नाम की दुकान में है  खाद्य उत्पादों की काफी संख्या में वैरायटी मिल रही हैं जिसमें पहाड़ी दालों आदि से लेकर पहाड़ी नमकीन, मडुवे से बने खाद्य पदार्थ मुख्य रूप से शामिल है। जहां कुमाऊं की दुकान का नेतृत्व पिथौरागढ़ से पिछले 28 वर्षों से लगातार दुकान लगा रहे देवकी जोशी तथा उनका परिवार कर रहा है। पिथौरागढ़ से आई देवकी जोशी बताती हैं कि इसके पहले उनके चारो बेटे इस दुकान को यहां पर चैती मेले में लगाते थे लेकिन अब सभी नौकरी पेशा होने के कारण इस दुकान को वह और उनके पति लगाते हैं।

 

कुमाऊं नमकीन के नाम से लगे इस दुकान में पहाड़ पर पैदा होने वाले अनाज तथा दालों तथा सोयाबीन का उपयोग नमकीन चिप्स भुजिया आदि के रूप में बनाकर अपने उत्पादों को दूर-दूर तक वह पहुंचा रहे हैं तो वहीं पर्वतीय खाद्यान्नों को देश में दूर-दूर तक पहुंचा रहे हैं। कुमाऊं नमकीन के लगे प्रतिष्ठान में मडुआ स्टिक, मडुआ चिप्स, मडुआ भुजिया, मडुवा लहसुन सेव, सोया प्लेन, सोया स्पाइसी, सोया स्टिक, मेथी सेव, सोया चिप्स गहत स्पाइसी, काले और सफेद भट्ट की नमकीन, खट्टा मीठा, नवरत्न और कुमाऊं मिक्स आदि पहाड़ी उत्पादों की नमकीन उपलब्ध है।

 

देवकी जोशी का मानना है कि पहाड़ के पलायन को रोकने के लिए पहाड़ में लघु व्यवसाय तथा इस तरह के व्यवसाई होने काफी जरूरी है जिससे कि पहाड़ का युवा बेरोजगार ना हो तथा साथ ही साथ पहाड़ी उत्पादों को तथा पहाड़ी दालों को प्रोडक्ट के रूप में निखारा जा सके। उनके मुताबिक पहाड़ के जिस मडुवा, काले और सफेद भट्ट, गहत और सोयाबीन को लोग गाय भैंसों को खिलाते थे उनका मूल्य संवर्धन कर इन सब को नमकीन के रूप में प्रयोग कर किया है। उनके उत्पाद अपनी तरफ चैती मेले में आए लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे हैं। चैती मेले में घूमने आने वाले काशीपुर तथा आसपास तथा दूर दराज के क्षेत्र के लोग इन पर्वतीय खाद्य पदार्थों और नमकीन आदि को खूब पसंद कर रहे हैं तथा इसको जमकर खरीद रहे हैं।

 

देवकी जोशी बताती हैं कि उनका मुख्य उद्देश्य पहाड़ के पलायन को रोकना और पहाड़ के अनाजों को नई पहचान दिलाना था। वह पहाड़ के अनाजों को नई पहचान दिलाने में तो सफल हुई है लेकिन पहाड़ के पलायन को रोकने में सक्षम नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में रोजगार का भाव है और पहाड़ की युवा पीढ़ी रोजगार की तलाश में शहर शहर भटक रही है।

 

वह कहती हैं कि सरकार अगर पहाड़ पर छोटे उद्योग लगाकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए पहाड़ के पलायन को रोका जा सकता है तथा पहाड़ को मजबूत किया जा सकता है। विजय और देवकी जोशी की यह छोटी-सी पहल उन लोगों के लिए एक संदेश का काम करेगी जो कि यह समझते हैं कि पहाड़ पर रोजगार बिल्कुल नहीं है ऐसे में इन उत्पादों को जरूरत है नवयुवकों की जो कि पहाड़ के अनाज और दालों का प्रचार करके यहां के उत्पादों को दूर-दूर तक पहुंचा सके।

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