उत्तराखंड समेत पूरे कुमाऊं में चीर बन्धन के साथ हुई खड़ी होली की शुरुआत…..

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चीर बन्धन के साथ कुमाऊं में हुई खड़ी होली की शुरुआत….

हल्द्वानी- चीर बंधन और रंग डालने के साथ गुरुवार को उत्तराखंड समेत पूरे कुमाऊं में खड़ी होली की भी शुरुआत हो गई है। घरों में लोगो ने अपने देवताओं को रंग चढ़ाया और पितरों को याद किया। साथ ही अबीर, गुलाल लगा कर एक दूसरे को होली की बधाईया दी आपको बता दें कि कुमाऊं में चीर या निशान बंधन की भी अलग विशिष्ट परंपरायें हैं।इनका कुमाऊंनी होली में विशेष महत्व माना जाता है होलिकाष्टमी के दिन ही कुमाऊं में कुछ मन्दिरों में चीर बंधन का प्रचलन है, पर अधिकांश गांवों, शहरों में सार्वजनिक स्थानों में एकादशी को मुहूर्त देखकर चीर बंधन किया जाता है।

 

इसके लिए गांव के प्रत्येक घर से एक एक नए कपड़े के रंग बिरंगे टुकड़े ‘चीर’ के रूप में लंबे लट्ठे पर बांधे जाते हैं. इस अवसर पर ‘कैलै बांधी चीर हो रघुनन्दन राजा’, ’सिद्धि को दाता गणपति बांधी चीर हो’ जैसी होलियां गाई जाती हैं। इस होली में गणपति के साथ सभी देवताओं के नाम लिऐ जाते हैं। कुमाऊं में ‘चीर हरण’ का भी प्रचलन है गांव में चीर को दूसरे गांव वालों की पहुंच से बचाने के लिए दिन-रात पहरा दिया जाता है।

 

चीर चोरी चले जाने पर अगली होली से गांव की चीर बांधने की परंपरा समाप्त हो जाती है. कुछ गांवों में चीर की जगह लाल रंग के झण्डे ‘निशान’ का भी प्रचलन है, जो यहां की शादियों में प्रयोग होने वाले लाल सफेद ‘निशानों’ की तरह कुमाऊं में प्राचीन समय में रही राजशाही की निशानी माना जाता है।

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