
समाचार प्लस लाइव | हेली सेवाओं पर मंडराया खतरा — केदारनाथ में चार हादसों के बाद जागा सिस्टम, मुख्यमंत्री धामी ने कंपनियों को दी कड़ी चेतावनी
ऋषिकेश/रुद्रप्रयाग:चारधाम यात्रा के दौरान उत्तराखंड पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए जहां हेलीकॉप्टर सेवा एक बड़ी सुविधा है, वहीं यह अब खतरे की उड़ान बनती जा रही है। केदारनाथ धाम और आस-पास के क्षेत्रों में बीते एक महीने में चार हेली हादसे सामने आ चुके हैं। इन हादसों में छह लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई बार बड़ा हादसा टलने की खबरें भी सामने आई हैं।
जिम्मेदार सिस्टम की चुप्पी और हेलीकॉप्टर कंपनियों की मनमानी इस बात की ओर इशारा कर रही है कि अगर अब भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो उत्तराखंड में भी अहमदाबाद जैसे बड़े हादसे की पुनरावृत्ति हो सकती है।
🚁 हादसों की डरावनी फेहरिस्त:
8 मई: उत्तरकाशी के गंगनानी क्षेत्र में एक चार्टर्ड हेलिकॉप्टर क्रैश, पायलट समेत छह की मौत।
12 मई: बदरीनाथ हेलिपैड पर थम्बी एविएशन का हेलिकॉप्टर रनवे पर फिसला, उड़ान से पहले हादसा टला।
केदारनाथ: हेली एंबुलेंस की टेल रोटर टूटी, इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।
सिरसी-बड़ासू मार्ग: केस्ट्रल कंपनी का हेलिकॉप्टर सड़क पर उतरा, बाल-बाल बचे यात्री।
इन सभी हादसों की वजह चाहे तकनीकी हो या मानवीय चूक, लेकिन एक बात स्पष्ट है — सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अत्यधिक एयर ट्रैफिक श्रद्धालुओं की जान को खतरे में डाल रहा है।
⚠️ हर ढाई मिनट में उड़ान, लेकिन नहीं है ATC सिस्टम!
गौर करने वाली बात यह है कि गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से औसतन हर ढाई मिनट में एक हेलीकॉप्टर उड़ान भर रहा है, लेकिन एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर की अब तक कोई व्यवस्था नहीं है। ना ही हवा की दिशा और दबाव मापने वाला कोई सिस्टम लगाया गया है।
12 सालों में 10 हादसे और करीब 30 मौतें होने के बावजूद अब तक सिविल एविएशन अथॉरिटी (UCADA) की निष्क्रियता सवालों के घेरे में है।
🛑 सीएम धामी की सख्त चेतावनी:
इन घटनाओं पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सभी हेली सेवा कंपनियों, UCADA, AAIB और DGCA के साथ समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए कि
यात्रियों की संख्या बढ़ाने की होड़ में सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हेली सेवाएं बंद करनी पड़ीं तो भी पीछे नहीं हटेंगे।”
सीएम ने कहा कि यात्रियों की जान से बड़ा कोई लाभ नहीं हो सकता और हेली सेवा ऑपरेटरों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।
🔍 निष्कर्ष:
उत्तराखंड की पवित्र धरती पर चल रही चारधाम यात्रा में यदि हेली सेवाओं को एक “विलासिता” के बजाय एक “जिम्मेदारी” के रूप में न देखा गया, तो न केवल श्रद्धालुओं की आस्था बल्कि उनकी जान भी दांव पर लग सकती है।
