सख्ती भी, संवेदनशीलता भी—सुखवंत प्रकरण में एसएसपी मणिकांत मिश्रा की कार्रवाई पर मुहर, सीएम धामी के निर्देशों से और मजबूत हुआ पक्ष
उधम सिंह नगर। किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण के बाद उठे सवालों और सोशल मीडिया पर चल रही बयानबाज़ी के बीच एक बात साफ है—एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने मामले को दबाने नहीं, बल्कि सामने लाकर सख्त कार्रवाई का रास्ता चुना। यही वजह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा कड़ी और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाने को एसएसपी की कार्यशैली पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
मामला सामने आते ही एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के ताबड़तोड़ फैसले लिए लापरवाही के आरोपों में थानाध्यक्ष और चौकी प्रभारी को तत्काल निलंबित किया गया, जबकि पैंगा पुलिस चौकी के पूरे स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया गया। इस कार्रवाई ने पुलिस महकमे से लेकर आमजन तक साफ संदेश दे दिया कि मणिकांत मिश्रा के रहते कानून व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं चलेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मामले की गहन जांच होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री का यह रुख एसएसपी की त्वरित कार्रवाई को नैतिक और प्रशासनिक बल देता है।
सबसे अहम बात यह है कि इस पूरे प्रकरण में पीड़ित परिवार ने भी एसएसपी मणिकांत मिश्रा की भूमिका की सराहना की है।
परिजनों का कहना है कि एसएसपी ने न सिर्फ संवेदनशीलता दिखाई, बल्कि उन्हें यह भरोसा भी दिलाया कि न्याय की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ी जाएगी।
गौरतलब है कि एसएसपी मणिकांत मिश्रा अपने सवा साल के कार्यकाल में अपराधियों के खिलाफ सख्त रवैये और जनता के प्रति संवेदनशील प्रशासनिक शैली के लिए जाने जाते हैं। कम्युनिटी पुलिसिंग, जनता दरबार और मौके पर फैसले—यही उनकी पहचान है। यही कारण है कि जनपद में कानून व्यवस्था को लेकर उनके फैसले आमजन में भरोसा पैदा करते हैं।
कुल मिलाकर, सुखवंत प्रकरण में एसएसपी मणिकांत मिश्रा की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि यहां अफसरशाही नहीं, बल्कि जवाबदेही और कानून सर्वोपरि है—और मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों ने इस संदेश को और मजबूत कर दिया है।
