श्रीमद्भगवद्गीता जयन्ती के उपलक्ष्य में संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित व्याख्यान माला “श्रीमद्भगवद्गीतायम् प्रबन्धनम्”का आयोजन किया गया

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नैनीताल- श्रीमद्भगवद्गीता जयन्ती के उपलक्ष्य में संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित व्याख्यान माला “श्रीमद्भगवद्गीतायम् प्रबन्धनम्”  का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान माला  के मुख्यवक्ता प्रो0 रमेश कुमार पाण्डेय, पूर्व कुलपति श्री लाल बहादुरशास्त्री केन्द्रीय-संस्कृत विद्यापीठ, न्यू-देहली, सारस्वतवक्ता प्रो0 महावीर अग्रवाल, पूर्व कुलपति उत्तराखंड-संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार, वर्तमान में प्रतिकुलपति पतञ्जलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार,

 

प्री  इन्दु पाठक, कला संकायाध्यक्ष डी0एस0बी0 परिसर, नैनीताल श्रीमद्भगवद्गीता प्रबन्धन के कार्यक्रम में मुख्य वक्ता रहे  रहे। पूर्व कुलपति  प्रो0 रमेश कुमार पाण्डे जी ने श्रीमद्भगदगीता का माहात्म्य का वर्णन करते हुए एक परम रहस्यमय  ग्रन्थ बताते हुए इसमें सम्पूर्ण वेदों का सार संग्रह किया गया है एकाग्रचित्त होकर भक्ति सहित विचार करने से इसके पद-पद में परम रहस्यभार हुआ प्रत्यक्ष प्रतीत होता है। भगवान के गुण, प्रभाव और मर्म का वर्णन जिस प्रकार गीताशास्त्र में किया गया है, वैसा अन्य ग्रन्थों मिलना कठिन है।

 

श्रीमद्भगवद्गीता रूप एक ऐसा अनुपमेय शास्त्र कहा है कि जिसमें एक भी शब्द सदुपदेश से खाली नहीं है।  श्रीवेदव्यास जी ने महाभारत में गीता का वर्णन किया है- गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यै: शास्त्रविस्तरै:। या स्वयं पद्यनाभस्य मुखपद्याद्विनि: सृता।।  गीता सुगीता करने योग्य है अर्थात श्रीगीता को भली प्रकार पढ़कर अर्थ और भावसहित अन्त:करण में धारण कर लेना मुख्य कर्तव्य कहा। पतंजलि विश्वविद्यालय  के प्रति कुलपति  प्रो0 महावीर अग्रवाल जी ने श्रीमद्भावद्गीता से कुछ महत्त्वपूर्ण सीख देते हुए बताया कि श्रीमद्भभगवद्गीता मानव धर्म के प्रमुख ग्रन्थों में से एक है

 

जो मन, शरीर और आत्मा की जीवन शैली के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है श्रीमद्भगवद्गीता मात्र एक कहानी नही है आज के सामाजिक प्रवेश से इसे कई तरीके से जोड़ा जा सकता है जीवन के निर्देशक के रूप में श्रीमद्भगवद्गीता के कुछ महत्वपूर्ण सीख हमे दी। जो हमे अपने जीवन मे अनुसरण करना चाहिए। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण हमे यह समझते  है कि कैसे हार-जीत की भावनाओं अन्य भविष्य के डर से हमे मुक्त होना चाहिए। और कैसे अपने जीवन को सुख से जीना है।  समन्वयक  प्रो0 जया तिवारी, विभागाध्यक्ष संस्कृत, नए सभी का स्वागत किया तथा कार्यक्रम की रूप रेखा रखी ।

 

संकायाध्यक्ष  प्री इंदु पाठक नए कहा की गीता महान ग्रंथ है जिससे जीवन में कर्म की प्रेरणा मिलती है ।प्रो0 ललित तिवारी, निदेशक, अतिथि प्राध्यापक निदेशालय कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल, ने संचालन करते हुए भगवद गीता का पूर्ण वर्णन किया उन्होंने कहा की यह 5160 वा वर्ष है गीता जयंती है ।भगवद गीता  कर्म ,शरीर के सययोजन की कड़ी है इसके 18अध्याय 7oo श्लोक  जीवन का सार प्रस्तुत करते है ।जीवन का दर्शन ही बगवाड़ गीता है जिससे भगवान का गीत भी लहराए है ।

 

डॉ0 नीता आर्या, ने सभी का धनबाद किया । तकनीकि संयोजक   डॉक्टर लज्जा भट्ट ,डॉ0 प्रदीप कुमार, सहसंयोजका डॉ0 सुषमा जोशी एवं सहयोगी श्रीमती भावना राणा, बी0एस0बी0 बिष्ट, श्रीमती सीमा देवी, शोधार्थी भावना काण्डपाल, चित्रेश चिलवाल, हर्षित, निकिता, सुषमा नेगी, संजना, हिमांशु शर्मा आदि नए विदेश सहयोग किया । श्रीमद्भगवद्गीता जयन्ती के अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। निबन्ध प्रतियोगिता में  गुंजन बिष्ट ने प्रथम स्थान , तनीषा जोशी ने द्वितीय स्थान एवं  बीना बिष्ट ने तृतीय स्थान तथा कु0 संजना आर्या को प्रोत्साहन पत्र दिया गया।

 

पोस्टर प्रतियोगिता में कंचन मेहरा ने प्रथम स्थान, अमर जोशी ने द्वितीय स्थान तथा सन्ध्या रानी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। श्लोकोच्चारण में चित्रेश चिलवाल ने प्रथम स्थान व मोहित पाण्डे ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। भाषण प्रतियोगिता में दीक्षा पाण्डे ने प्रथम स्थान, हर्षित जोशी ने द्वितीय स्थान तथा बीना बिष्ट ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।  कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से कुलगीत एवम राष्ट्रगान से समापन हुआ ।संस्कृत के  विद्यार्थियों द्वारा  मंगला चरण एवम दीप मंत्र प्रस्तुत किया ।सभी को रोली पिट्ठू लगाया गया।

 

कारक्रेम में डॉक्टर राजमंगल यादव ने दोनो वक्ताओं का परिचय कराया ।कार्य क्रम में प्रो रमेश पांडे , प्री महावीर अग्रवाल ,प्रो इंदु पाठक ,प्रो ललित तिवारी , निर्णायक डॉक्टर सीमा चौहान को शॉल उड़ाकर तथा भगवद गीता भेट कर सम्मानित किया गया । विजयी विद्याथिओ को प्रमाण पत्र तथा भगवद गीता भेट की गई ।इस कार्यक्रम में  प्रो गिरीश रंजन तिवारी   प्रो लता पांडे ,प्रो पीके  मिस्र, डॉक्टर नवीन पांडे,डॉक्टर दीपा आर्य ,नंदबललभ पालीवाल ,दीपक बिष्ट, दिशा उप्रेती बिना बिष्ट ,हिमांशु शर्मा ,हर्षित शर्मा ,संजय जोशी ,चित्रांश चिलवाल सहित सैकड़ों विद्यार्थी उपस्थित रहे

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