रुद्रपुर जिला अस्पताल में अधिकारी हैं मस्त, और जनता जानता है परेशान,पढ़े पूरी ख़बर…………

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रुद्रपुर-रुद्रपुर जिला अस्पताल में अधिकारी हैं मस्त, जानता है परेशान, भ्रष्टाचारी है चरम पर यह हम नहीं कह रहे यह बयान कर रहा है रुद्रपुर जिला अस्पताल जहां पर सरकार द्वारा हर संभव मदद देने के बावजूद भी ना तो बिजली की व्यवस्था है और सरकार द्वारा जो मरीज और तीमारदारो के लिए खाने और नाश्ते की व्यवस्था सरकार द्वारा दी जा रही है उसमें किस तरीके से अधिकारी और ठेकेदार द्वारा बंदर बात किया जा रहा है

 

जब इसकी जानकारी हमने वहां पर मौजूद मरीजों से ली तो उन्होंने बताया यहां पर चार ब्रेड और आधा गिलास दूध सवेरे के टाइम में मिलता है जबकि सरकार द्वारा एक पैकेट दूध आंचल का एक मक्खन की टिक्की दो फल और चार ब्रेड मिलती हैं दोपहर में दो तरह की सब्जी छे रोटी और चावल एक डाइट में सरकार द्वारा दिया जा रहा है लेकिन विडंबना देखिए के अधिकारी और ठेकेदार की मिली भगत से किस तरीके से गरीब और मरीज और बेसहारा लोगों के अधिकार पर कैसे सरकारी अधिकारी और ठेकेदार डाका डाल रहे हैं

 

बात करें तो रुद्रपुर जिला अस्पताल इलाज के नाम पर बिल्कुल सुन नजर आता है करोड़ों रुपए लगने के बावजूद रूद्रपुर हॉस्पिटल के अंदर पेट के दर्द का इलाज तक ढंग से नहीं हो पता है हमारे संवाददाता द्वारा जब इसकी जानकारी ली गई तो क्या पता लगा 28/अगस्त/2023 को अखिलेश सिंह ने 8 साल के अपने बेटे कौशल को पेट दर्द की शिकायत होने की वजह से सरकारी हॉस्पिटल में दिखाया जिसमें डॉक्टर पारस गुप्ता और डॉक्टर गोस्वामी ने उसे चार दिन तक अस्पताल में एडमिट करने के बाद गंभीर बीमारी बताते हुए हायर सेंटर हल्द्वानी रेफर करने की बात कही जबकि मामूली सा दर्द था

 

और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में बिल्कुल नॉर्मल रिपोर्ट की पुष्टि की जा रही थी जब पीढ़ीत द्वारा डॉक्टर से बाहर रेफर करने का कारण पूछा गया तो डॉक्टर द्वारा पल्ला झाड़ते हुए अल्ट्रासाउंड ना होने की बात कह कर रेफर करने की बात कही जब पीड़ित अखिलेश सिंह द्वारा इसकी सूचना हमारे संवाददाता को दी गई तो संवाददाता द्वारा प्रमुख अधीक्षक राजेश सिंह से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमारे यहां जो डॉक्टर हैं उनके बच्चों के पेट का दर्द किस कारण से हो रहा है

 

यह समझ पाना मुश्किल हो रहा है इसलिए उनको हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है जब हमारे संवाददाता द्वारा अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में नार्मल रिपोर्ट होने की बात कही गई तो प्रमुख अधीक्षक द्वारा बच्चों को द्वारा एडमिट करने की बात करने लगे सवाल उठता है कि तीन-तीन लाख रुपए लेने के बाद ऐसे काबिल डॉक्टर होकर भी एक पेट के दर्द का इलाज जिला अस्पताल रुद्रपुर में नहीं हो पा रहा है

 

और दूसरी तरफ माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश को अस्पताल में अच्छा इलाज दिलाने की बात की जा रही है बात करें तो उधम सिंह नगर के सांसद एवं रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट का संसदीय क्षेत्र होने के बावजूद अच्छी सुविधा नहीं मिल पा रही लेकिन इन सब के पीछे सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब डॉक्टर अपने घर में बड़ी बीमारी दिखाकर मरीजों को अपने घर में इलाज करने पर मजबूर कर रहे हैं अगर समय रहते हुए इन पर लगाम नहीं लगाई गई

 

तो ऐसे कितने लोग हैं जिन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा जब पीढ़ीत द्वारा प्राइवेट हॉस्पिटल डॉक्टर नितिन बठला को दिखाया गया तो उसने नॉर्मल सा एक्सरा करते ही बच्चों की पेट का दर्द पेट की आंते चौक होने का कारण बताया और 4 घंटे के अंदर बच्चों की पेट की आंतों को साफ कर शाम को उसको ठीक कर कर छुट्टी दे दी अब सवाल उठता है कि जिस तरीके से तीन-तीन लाख रुपये तलक लेने के बाद और उसे अलावा प्राइवेट में घरों में मरीजों को देखने के बावजूद सरकारी सुविधा ले रहे इन डॉक्टरों के ऊपर सरकार द्वारा करवाई अमल में लाई जाए तभी जाकर कुछ आम आदमी एवं गरीब आदमियों को सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ मिल सकता है देखते हैं हमारी खबर के बाद सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जाते हैं यह तो आने वाला वक्त बताएगा

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