दुगड़डा में बाल कौथिक और पोषण पखवाड़े का रंगारंग समापन, उमरावनगर में हुआ भव्य आयोजन….

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पौड़ी – बाल विकास परियोजना दुगड़डा तथा दोस्त फाउंडेशन के द्वारा मिलकर बाल कौथिक एवं पिछले एक सप्ताह से चले आ रहे पोषण पखवाड़े का समापन कार्यक्रम उमरावनगर के पंचायत घर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दोस्त फाउंडेशन के साथ साथ स्वास्थ्य विभाग एवं शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के द्वारा प्रतिभाग किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इसके पश्चात बच्चों के द्वारा प्रार्थना कारी गई तथा स्वास्थ्य विभाग के द्वारा गर्भवती महिलाओं एवं धात्री महिलाओं को पोषण एवं स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई इसी के साथ-साथ कुपोषण से बचाव हेतु बच्चों के खान-पान के विषय में भी विशेष जानकारी दी गई। दोस्त एजुकेशन के सहयोग से बाल कौथिक–एक नई पहल सामूदायिक कार्यक्रम के अंतर्गत अजहर के द्वारा द्वारा समुदाय के लोगों को उत्तरदायी देखभाल के महत्व के बारे में बताया गया कि बच्चे की परवरिश में समुदाय और माता–पिता की क्या भूमिका होती है।

इसमें बातें, स्नेह और खेल के माध्यम से माता–पिता कैसे बच्चों का सर्वांगीण विकास में योगदान दे सकते हैं के बारे में भी बताया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के माता–पिता तथा समुदाय के लोगों को उत्तरदायी देखभाल के प्रति जागरूक करना तथा घर पर सीखने का माहौल बनाकर स्कूल के लिए तैयार करना है। इसके पश्चात बाल विकास परियोजना अधिकारी नेहा बेलवाल एवं स्वास्थ विभाग से डॉक्टर चारु के द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की गई तथा सात माह के बच्चों का अन्नप्राशन किया गया।

05 महिलाओं को महालक्ष्मी किट का वितरण किया गया।

इसके पश्चात मनसार लोक कला सांस्कृतिक समिति के द्वारा सभी लाभार्थियों को पोषण गीत, गर्भवती महिलाओं को 1000 दिन का महत्व समझाते हुए नुक्कड़ नाटक एवं लोक गीत के द्वारा महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। कार्यक्रम में प्रदेश में दसवीं की बोर्ड परीक्षा में 25 वां स्थान प्राप्त करने वाली प्रियांशी रावत को भी सम्मानित किया गया एवं उनसे उनकी परीक्षा से संबंधित तैयारियों को अन्य किशोरी बालिकाओं से साझा किया गया।

कार्यक्रम का सफल सुपरवाइजर शिवाली के द्वारा किया गया ।

वसुंधरा नेगी संतोषी गोसाई एवं सुनीता के द्वारा कार्यक्रम में गतिविधियां संपन्न करने में योगदान किया गया। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाएं उनके पति धात्री महिलाएं ,3 से 6 वर्ष के बालक बालिका उनके माता-पिता ,किशोरी बालिकाएं एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां उपस्थित थी।

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