एमबीजीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का समापन…….

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हल्द्वानी- आईसीएसएसआर नई दिल्ली और एम.बी.जी.पी.जी हल्द्वानी के संयुक्त तत्वावधान में “अंडरस्टैंडिंग सस्टेनेबल होमस्टे टूरिज्म एज़ ए ड्राइविंग फैक्टर ऑफ टूरिस्ट्स सैटिस्फैक्शन थ्रू स्ट्रक्चरल इक्वेशन मॉडलिंग: केस ऑफ कुमाऊं रीजन ऑफ उत्तराखंड” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार को भव्य समापन हुआ। समापन में मुख्य अतिथि प्रोफेसर प्रोफेसर इंदु पाठक , ने कहा कि”सस्टेनेबल होमस्टे पर्यटन न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, “यदि इस मॉडल को सही दिशा में विकसित किया जाए, तो यह कुमाऊं क्षेत्र में पर्यटन उद्योग का आधार बन सकता है।

 

इससे न केवल पर्यटकों को एक प्रामाणिक अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड सरकार होम स्टे पर्यटन को लेकर काफ़ी काम कर रही है। तथा होम स्टे में महिलाओं के योगदान की सराहना की विशिष्ट अतिथि रेनू प्रकाश ने कहा कि सस्टेनेबल होमस्टे पर्यटन पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक विकास का प्रभावी माध्यम है। कुमाऊं में इसकी अपार संभावनाएं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी और सही दिशा में प्रयास इसे एक सफल मॉडल बना सकते हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सस्टेनेबल पर्यटन की सफलता के लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। नीति निर्माण में स्थानीय जरूरतों और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना बनानी !

समापन सत्र के मुख्य वक्ता डी.एस. बिष्ट ने अपने संबोधन में कहा कि सस्टेनेबल होमस्टे पर्यटन स्थानीय समुदाय के आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मजबूत आधार है।

उन्होंने संरचनात्मक समीकरण मॉडलिंग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए शोधकर्ताओं से इस क्षेत्र में गहन अध्ययन कर उपयोगी नीतिगत सुझाव देने की अपील की। सेमिनार में 7 तकनीकी सत्र आयोजित किये गये जिसमें 150 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किये गये। जिनमें सस्टेनेबल पर्यटन, पर्यावरणीय संतुलन, और पर्यटकों की संतुष्टि के विषयों पर गहन चर्चा हुई। शोध पत्रों में उत्तराखंड राज्य के होमस्टे मॉडल की संभावनाओं और चुनौतियों को रेखांकित किया गया।

सेमिनार के समापन पर आयोजक प्रोफेसर कमरुद्दीन ने बताया कि ” कि यह सेमिनार शोधार्थियों और नीति निर्माताओं को सस्टेनेबल होमस्टे पर्यटन के क्षेत्र में नई दिशा देगा।

 

उन्होंने शोधकर्ताओं से अपील की कि वे अपने शोध को व्यावहारिक रूप से लागू करने के प्रयास करें। क्योंकि इस सेमिनार का उद्देश्य कुमाऊं क्षेत्र में सस्टेनेबल होमस्टे पर्यटन को बढ़ावा देना और इसके माध्यम से स्थानीय समुदायों के आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना है समापन सत्र का संचालन डॉ प्रभा पन्त ने किया उन्होंने अपनी कविता की पंक्तियों के माध्यम से कहा  “बीत गयीं सदिया, लेकिन मीरा आज भी जिन्दा है।

देख के जग की कततूतों को,भक्ति युग भी शर्मिंदा है।

अधिकार पाने को उस युग में, विषपान उसे करना पडा।

मनचाही राह चलने को, घर-बाहर सबसे लडना पडा।

इस युग में भी जिस औरत ने, मनचाही राह बनाई।

चुनौती को स्वीकार किया, संघर्ष की अलख जगाई।

वही औरत हर एक युग में, उस युग की मीरा कहलाई।”

इस अवसर पर प्रोफेसर एम.पी. सिंह ,प्रोफेसर नीलोफर अख़्तर,प्रोफेसर शशांक शुक्ला, प्रोफेसर कविता बिष्ट, प्रोफेसर चारू चंद्र धौंडियाल, प्रोफेसर रेणु रान, प्रोफेसर महेश कुमार, प्रोफेसर चंद्रा खत्री, डॉ.मंजू पनेरू,डॉ.अनुराधा, डॉ. ज्योति टम्टा, डॉ सोनी टम्टा, डॉ अंजू बिष्ट आदि उपस्थित रहे।

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