(उत्तराखंड)। राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के हालिया रुद्रपुर दौरे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष के प्रदेश अध्यक्ष से आमतौर पर अपेक्षा होती है कि वे क्षेत्रीय समस्याओं को मजबूती से उठाएं, लेकिन माहरा का पूरा दौरा महज़ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और कुछ पुराने आरोपों की पुनरावृत्ति तक सीमित रह गया।
करन माहरा ने हल्दी स्थित टीडीसी में प्रस्तावित ध्वस्तीकरण और बाजपुर एवं मटकोटा स्थित बीज संयंत्रों की स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर आरोप लगाए, लेकिन उनके आरोपों में कोई नया तथ्य सामने नहीं आया। प्रेस कॉन्फ्रेंस का पूरा स्वरूप पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की प्रेस वार्ता का पुनरावृत्ति जैसा नजर आया।
टीडीसी और बीज संयंत्र विवाद
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि बाजपुर और मटकोटा के बीज संयंत्रों को नष्ट करना दरअसल निगम को खत्म करने की साजिश है। जबकि हकीकत यह है कि इन संयंत्रों को वर्ष 2015-16 में ही बंद कर दिया गया था, उस समय राज्य में कांग्रेस की ही सरकार थी और रुद्रपुर से राजकुमार ठुकराल कांग्रेस विधायक थे। ऐसे में सवाल उठता है कि उस समय यह मुद्दा कांग्रेस नेताओं के एजेंडे से क्यों नदारद था?
टीडीसी का जवाब और पारदर्शिता का दावा
टीडीसी के अधिकारियों ने एक जवाबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं के सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि स्क्रैप ऑक्शन और ध्वस्तीकरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से और सरकारी नियमानुसार चल रही है। पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को लेकर उठाए जा रहे कदम प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
क्या हार की खीझ है पीछे?
चर्चा यह भी है कि कांग्रेस और पूर्व विधायक ठुकराल इस मुद्दे को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि जिस फर्म को टीडीसी का ध्वस्तीकरण कार्य मिला है, उसका संबंध वर्तमान भाजपा विधायक के रिश्तेदारों से है। हालांकि यह फर्म 2008 से रजिस्टर्ड है और बीते 14 वर्षों से सरकारी कार्य कर रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस अब सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित हो गई है या वह वास्तव में जमीनी मुद्दों पर जनसंघर्ष के लिए तैयार भी है?
