उधम सिंह नगर जिला मुख्यालय शहर का रम्पुरा क्षेत्र लंबे समय से नशे के कारोबार और युवाओं के हाथों में हथियारों की बढ़ती घटनाओं को लेकर चर्चा में रहा है। लेकिन इस इलाके की एक और पहचान भी बन गई है—रम्पुरा पुलिस चौकी में लगातार हो रहे चौकी इंचार्ज के तबादले।
पिछले करीब दो वर्षों में इस चौकी से सात चौकी इंचार्ज का तबादला हो चुका है। अब आठवीं बार चंदन सिंह बिष्ट को चौकी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
हैरानी की बात यह भी है कि रम्पुरा पुलिस चौकी में लगे बोर्ड पर चौकी इंचार्ज के कक्ष में केवल प्रदीप कोली का ही नाम अंकित है। उनके बाद आए किसी भी चौकी इंचार्ज का नाम अब तक बोर्ड पर दर्ज नहीं किया गया है।
रम्पुरा चौकी में केसी आर्य की तैनाती रही, लेकिन कुछ समय बाद उनका भी तबादला कर दिया गया।
इसके बाद चौकी की जिम्मेदारी नवीन बुधानी को दी गई। उन्होंने क्षेत्र में कानून व्यवस्था संभालने का प्रयास किया।
फिर गणेश दत्ता भट्ट को चौकी इंचार्ज बनाया गया और उन्होंने इलाके में पुलिसिंग को मजबूत करने की कोशिश की।
रम्पुरा चौकी में सबसे ज्यादा चर्चा प्रदीप कोली के कार्यकाल की रही। उन्होंने इलाके में खुलकर कार्रवाई करते हुए हथियार लहराने वाले कई लोगों को जेल भेजा और दर्जनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। उस दौरान बदमाशों में पुलिस का खौफ भी देखने को मिला।
हालांकि एक मामले को लेकर उनका भी तबादला कर दिया गया। सोशल मीडिया पर खबरें चलने के बाद कुछ समय के लिए उनका ट्रांसफर रुक गया, लेकिन बाद में उन्हें फिर से स्थानांतरित कर दिया गया।
इसके बाद विजेंद्र कुमार को चौकी की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन यहां स्थिरता ज्यादा समय तक नहीं रह पाई।
फिर आर सी बेलवाल को रम्पुरा चौकी भेजा गया और उन्होंने भी कानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की।
इसके बाद कविंद्र शर्मा ने चौकी संभाली। उनके कार्यकाल में भी क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनी रही और बदमाशों में पुलिस का खौफ देखने को मिला, लेकिन उनका भी तबादला कर दिया गया।
अब रम्पुरा चौकी की जिम्मेदारी चंदन सिंह बिष्ट को दी गई है। वह पिछले दो वर्षों में इस चौकी के आठवें चौकी इंचार्ज बने हैं।
रम्पुरा पुलिस चौकी रुद्रपुर कोतवाली के अधीन आती है और इसके अंतर्गत क्षेत्र भी काफी विस्तृत है। यहां कई संवेदनशील इलाके आते हैं, जहां समय-समय पर घटनाएं सामने आती रहती हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में वोट बैंक अधिक होने के कारण यहां अक्सर राजनीतिक दबाव भी देखने को मिलता है। इसी वजह से कई बार पुलिस की कार्रवाई प्रभावित हो जाती है।
रम्पुरा चौकी की कहानी भी कुछ अलग नजर आती है। जब भी कोई चौकी इंचार्ज सख्ती से काम शुरू करता है और बदमाशों पर शिकंजा कसने लगता है, तभी किसी न किसी घटना या शिकायत के बाद राजनीतिक फोन घनघनाने लगते हैं।
देखते ही देखते चौकी इंचार्ज पर इतना दबाव बन जाता है कि या तो कार्रवाई रोकनी पड़ती है या फिर कुछ ही समय में उनका तबादला कर दिया जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रम्पुरा क्षेत्र पहले से ही नशे और हथियारों की घटनाओं को लेकर संवेदनशील रहा है। ऐसे में पुलिस को सख्ती से काम करना पड़ता है, लेकिन कई बार नेताओं का हस्तक्षेप पुलिस के काम में बड़ी बाधा बन जाता है।
अब देखना होगा कि नशे और हथियारों के गढ़ बन चुके रम्पुरा में नए चौकी इंचार्ज चंदन सिंह बिष्ट कितनी सख्ती से कार्रवाई कर पाते हैं या फिर यहां तबादलों का वही पुराना सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
