भंग सीट पर गंगवार परिवार का दबदबा, विरोधियों की उड़ी नींद!गांव की गली हो या कस्बे की चौपाल, हर तरफ गूंज रहा है रेनू गंगवार का नाम
भंग क्षेत्र में जिला पंचायत चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है। लेकिन इस बार चुनावी समीकरण कुछ अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। क्षेत्र में वर्षों से सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय गंगवार परिवार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार परिवार की तरफ से रेनू गंगवार ने मैदान में उतरकर चुनावी माहौल को पूरी तरह अपने पक्ष में मोड़ दिया है।
रेनू गंगवार का नामांकन होते ही क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। उनके साथ उनके पति सुरेश गंगवार, जो कि पूर्व में भी पंचायत स्तर पर बेहद सक्रिय रहे हैं, कदम से कदम मिलाकर प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं। लोगों से सीधा संवाद, घर-घर संपर्क और मुद्दों पर बात करने की उनकी शैली ने विरोधी खेमे की चिंता बढ़ा दी है।
जनता का भरोसा — गंगवार परिवार के साथ
रेनू गंगवार की लोकप्रियता सिर्फ नामांकन तक सीमित नहीं रही। जैसे-जैसे वो क्षेत्र में दौरे कर रही हैं, जनता का समर्थन उनके साथ खुलकर आता दिख रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में खासतौर पर महिलाओं और बुजुर्गों के बीच रेनू गंगवार को भरपूर समर्थन मिल रहा है।
एक स्थानीय महिला मतदाता का कहना था, “रेनू भाभी हमेशा हमारे सुख-दुख में साथ रही हैं। कभी कोई जरूरत हो तो तुरंत घर तक मदद पहुंच जाती है। वो हमारे अपने लोगों में से हैं — बाहर से आई हुई कोई नेता नहीं।”
विकास, सेवा और सहजता बना रहे हैं माहौल
रेनू गंगवार ने अब तक के प्रचार में किसी बड़े मंच या दिखावे की बजाय सीधे जनता से जुड़ने की नीति अपनाई है। वह अपने पति सुरेश गंगवार के अनुभव का लाभ लेते हुए हर गांव, हर मोहल्ले में लोगों से सीधे संवाद कर रही हैं। उनके चुनाव प्रचार में किसी बड़े पोस्टर या बैनर की जगह जनता का मुंहजबानी प्रचार ज़्यादा असरदार दिख रहा है।
महिलाओं में खास पकड़, सादगी बनी ताकत
रेनू गंगवार किसी राजनीतिक परिवार से ज़रूर हैं, लेकिन उनका व्यवहार और जुड़ाव आम घरों की महिलाओं जैसा ही है। यही सादगी और सहजता उन्हें बाकी प्रत्याशियों से अलग बनाती है। वे खुद मंच से ज्यादा चौपालों और गलियों में बातचीत को प्राथमिकता दे रही हैं।
क्या कहता है चुनावी विश्लेषण?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भंग सीट पर फिलहाल मुकाबला एकतरफा होता दिख रहा है। गंगवार परिवार की मजबूत पकड़, रेनू गंगवार की स्थानीय स्वीकार्यता और विपक्ष की निष्क्रियता इस बात के संकेत हैं कि जनता का रुझान पहले ही तय हो चुका है।
भंग सीट पर इस बार चुनाव नहीं, भरोसे की मुहर लगाई जा रही है। गंगवार परिवार की वर्षों की सेवा, जनता से जुड़ाव और सादा व्यवहार ने रेनू गंगवार को जनता का चहेता चेहरा बना दिया है। अब देखना यह होगा कि विरोधी खेमे से कोई चुनौती आती भी है या नहीं।
