नैनीताल। सोमवार को हल्द्वानी के मीट मार्किट में अतिक्रमण हटाने को लेकर नगर निगम द्वारा की गयी कार्रवाई को लेकर हल्द्वानी निवासी विजय पाल सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने हल्द्वानी में नगर निगम द्वारा मछली बाजार में अतिक्रमण हटाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर निगम व सरकार से छह सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। अदालत ने निगम व सरकार से पूछा है कि मछली बाजार व अतिक्रमणकारियों को कहां विस्थापित किया जा सकता है। सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में हुई।
विदित हो कि याचिका के अनुसार इस बात का उल्लेख किया गया है कि वे 1960 से इस स्थान में मीट बेचने का कारोबार कर रहे हैं। उन्हंे नगर निगम ने लाइसेंस भी दिया हुआ है। हाईकोर्ट ने वादियों का पक्ष सुनते हुए नगर निगम व सरकार से छह सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। अदालत ने निगम व सरकार सेपूछा है कि मछली बाजार व अतिक्रमणकारियों को कहां विस्थापित किया जा सकता है। सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान मुख्य स्थायी अधिवक्ता सीएस रावत की ओर से कोर्ट में बताया कि मछली बाजार में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। प्रशासन व नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने के लिए 31 मार्च को नोटिस जारी किया था। साथ भी यह निर्देश दिया था कि जिन अतिक्रमणकारियों के पास वैध लाइसेंस है वह अपने लाइसेंस दिखाकर अपना पक्ष रखें। निर्धारित समय में अतिक्रमणकारियों ने कोई सबूत पेश नहीं किया। इसलिए प्रशासन ने सरकारी भूमि से अतिक्रमण को हटा दिया।
आखिर क्या है मामला…
हल्द्वानी। हल्द्वानी के विजय पाल सिंह व अन्य ने उच्च न्यायालय मंे याचिका दायर कर कहा है कि वे 1960 से यहाँ मीट का कारोबार करते आए हैं। उन्हें नगर निगम ने लाइसेंस भी दिया हुआ है। इससे पूर्व हल्द्वानी में नगर पालिका के दौरान चोरगलिया व रामपुर रोड में दो मीट मार्केट संचालित हुआ करती थी। हल्द्वानी मेें नगर निगम के गठन के बाद वहां पक्की दुकानें बनाकर अन्य को दे दी गईं। इसके बाद वहां से मीट कारोबारियों को मछली बाजार मेें शिफ्ट कर दिया गया। वे तब से इसी स्थान पर मीट का कारोबार करते आ रहे हैं। हल्द्वानी नगर निगम ने यहां कारोगार कर रहे व्यापारियों को 31 मार्च को नोटिस देकर 4 अप्रैल को ध्वस्तीकरण के आदेश दे दिए। वहीं उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि जब तक उन्हें विस्थापित नहीं किया जाता तब उन्हें इसी स्थान में कारोबार की अनुमति प्रदान की जाए। याचिका में सचिव शहरी विकास उत्तराखंड सरकार, डीएम नैनीताल, एसडीएम हल्द्वानी, एसएसपी नैनीताल व एसएचओ हल्द्वानी को पक्षकार बनाया गया है।
