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मानसून 2025 को लेकर सीएम धामी सतर्क: ‘आपदा सखी योजना’ शुरू करने की घोषणा, हर जिले में राहत कार्य तेज़ करने के निर्देश
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को आयोजित “Monsoon-2025: Preparedness” कार्यशाला में प्रतिभाग किया और राज्य को आपदा प्रबंधन की दिशा में और अधिक मजबूत बनाने की मंशा जताई। इस मौके पर उन्होंने महिला स्वयंसेवकों को आपदा प्रबंधन से जोड़ने हेतु “आपदा सखी योजना” शुरू करने की घोषणा की।

🔸 आपदा सखी योजना” की मुख्य बातें:
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत महिलाओं को आपदा पूर्व चेतावनी, प्राथमिक उपचार, राहत-बचाव और मानसिक सहायता जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह योजना महिला सशक्तिकरण और समाज की सक्रिय भागीदारी को एक नई दिशा देगी।

🔸 मुख्यमंत्री के संबोधन की प्रमुख बातें:
उत्तराखण्ड एक संवेदनशील राज्य है, जहाँ भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना और बाढ़ जैसी आपदाएं आम हैं।
2024 की घटनाओं जैसे गौरीकुंड बादल फटना और तोली गांव में भूस्खलन में प्रोएक्टिव कार्यशैली अपनाकर सैकड़ों लोगों की जान बचाई गई।
जनभागीदारी और विभागीय समन्वय को आपदा प्रबंधन का मूल आधार बताया।
सभी जिलों में भंडारण, उपकरण तैनाती और तकनीकी निरीक्षण अभी से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
🔸 मुख्यमंत्री के निर्देश:
संवेदनशील क्षेत्रों में जेसीबी, क्रेन व उपकरणों की तैनाती
पुराने पुलों की तकनीकी जांच और जरूरत अनुसार बैली ब्रिज की व्यवस्था
जलस्तर मॉनिटरिंग के लिए तकनीकी यंत्र और मैनपावर की तैनाती
खाद्यान्न, ईंधन, पेयजल और दवाओं का पूर्व भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश
🔸 एन.डी.एम.ए के सदस्य राजेन्द्र सिंह का वक्तव्य:
इस वर्ष उत्तराखण्ड में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना है।
15 जून से सितंबर तक राज्य के लिए संवेदनशील अवधि।
चारधाम यात्रा का सुचारु संचालन, राज्य सरकार की सराहनीय तैयारी।
भूस्खलन से निपटने के लिए ₹140 करोड़, संवेदनशील झीलों के लिए ₹40 करोड़ तथा फॉरेस्ट फायर के लिए ₹16 करोड़ की योजनाएं स्वीकृत।
🔸 उपस्थित विशिष्टजन:
कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आपदा सचिव श्री विनोद कुमार सुमन, प्रमुख वन संरक्षक श्री धनंजय मोहन, उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष श्री विनय रोहेला सहित सभी विभागों के अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री द्वारा घोषित आपदा सखी योजना न सिर्फ महिला भागीदारी को बढ़ावा देगी, बल्कि राज्य की आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाएगी। मानसून से पहले यह कार्यशाला जन-सुरक्षा और विभागीय तैयारियों की दिशा में एक बड़ा कदम है।
