उत्तराखण्ड बनेगा ‘ग्रीन हेल्थ सिस्टम’ का मॉडल राज्य: एक्सपायर्ड दवाओं के लिए बनेगा टेक-बैक सिस्टम, सीएम धामी की बड़ी पहल

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समाचार प्लस लाइव | देहरादून

उत्तराखण्ड बनेगा ‘ग्रीन हेल्थ सिस्टम’ का मॉडल राज्य: एक्सपायर्ड दवाओं के लिए बनेगा टेक-बैक सिस्टम, सीएम धामी की बड़ी पहल

उत्तराखण्ड अब जल्द ही देश का पहला ऐसा राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है, जहां एक्सपायर्ड और अप्रयुक्त दवाओं के वैज्ञानिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से निस्तारण के लिए सुनियोजित प्रणाली लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने यह ऐतिहासिक कदम “स्वस्थ नागरिक, स्वच्छ उत्तराखण्ड” मिशन के तहत उठाया है।

🔹 CDSCO के दिशा-निर्देश होंगे लागू

राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को लागू करने की दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त एफडीए डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य उत्तराखण्ड को देशभर में “हरित स्वास्थ्य प्रणाली” का आदर्श राज्य बनाना है।

🔹 पहली बार बनेगा दवा निस्तारण का तंत्र

अब तक दवाओं के सुरक्षित निस्तारण के लिए राज्य में कोई सुसंगत प्रणाली नहीं थी। यह स्थिति खासकर पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखण्ड जैसे राज्य के लिए गंभीर थी। लेकिन अब सरकार शहरी, अर्ध-शहरी और पर्वतीय क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से “ड्रग टेक-बैक साइट्स” स्थापित करने जा रही है, जहां आम नागरिक अपने घरों में पड़ी एक्सपायर्ड, अप्रयुक्त या खराब हो चुकी दवाएं जमा कर सकेंगे।

इन दवाओं को विज्ञानसम्मत ढंग से प्रोसेसिंग यूनिट्स में नष्ट किया जाएगा, जिससे जल, मिट्टी और जीव-जंतुओं पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा।

🔹 सभी हितधारकों की होगी जिम्मेदारी

अपर आयुक्त एफडीए व ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि इस व्यवस्था को ‘थर्ड पार्टी मॉनिटरिंग सिस्टम’ और स्थानीय ड्रग एनफोर्समेंट यूनिटों के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि:

निर्माता कंपनियों

थोक और खुदरा विक्रेताओं

अस्पतालोंvऔर आम उपभोक्ताओं

सभी की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे ताकि जनता इस व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी निभा सके।

🔹 पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों की रक्षा

डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि यह पहल केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा प्रयास है। हरित और सतत स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए यह एक नया मॉडल बनकर उभरेगा।

मुख्यमंत्री धामी की सोच और पहल उत्तराखण्ड को पर्यावरणीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा और दूरगामी कदम है। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह **दूस

 

 

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