रुद्रपुर में लगने वाला जाम लोगों के लिए बना मुसीबत

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तपती धूप में जाम से लोगों का जीवन प्रभावित छूटे पसीने

रुद्रपुर-(एम् सलीम खान) रुद्रपुर शहर में चल रहे निर्माण कार्यों से लगने वाला जाम लोगों के लिए खासी मुसीबत बन गया है।आलम यह है कि लोगों का आधा दिन जाम में ही गुजर रहा है। हल्द्वानी रोड़ पर राष्ट्रीय राजमार्ग निमार्ण के चलते लगने वाला यह जाम शहर के लोगों के लिए एक बड़ी मुश्किल का रूप धारण कर चुका है। जिला अस्पताल से लेकर दिनेशपुर मोड़ तक लंबी कतार में खड़े वाहन पल पल खिसक रहें हैं। इन दिनों हल्द्वानी रोड़ के निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।जिसकी वजह से इस रोड़ पर भयंकर जाम लगा हुआ है।आलम यह है कि जिला मुख्यालय भी इसी रोड़ पर स्थित है।जाम की वजह से जिले के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने वाले फरियादियों का आधा दिन जाम में ही फंसे होने के कारण सड़क पर गुजर जाता है।

 

कड़ी मशक्कत के बाद अगर कोई फरियादी जाम से मुक्ति होकर संबंधित अधिकारी तक पहुंच जाता है तो अधिकारी लांच के लिए निकल जाते हैं।हालत यह है कि सर का पसीना एंडी तक आ जाता है। इसके अलावा इस रोड़ पर धूल का गुबार भी लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। घंटों जाम में फंसे लोग धूप फांकने के लिए विवश हैं। हालांकि यातायात व्यवस्था को संभलने के लिए पसीना बहाने वाली धूप में सीपीयू और यातायात पुलिस के जवान यह मुस्तैदी से ड्यूटी निभा रहे हैं। लेकिन उनके सारे प्रयास असफल साबित हो रहें हैं। वही पुलिस का कहना है कि उसके पास फोर्स की भारी कमी है।जिसकी वजह से गिनें चुनें सिपाहियों को जाम से निपटने के लिए तैनात किया गया। अस्पताल जाने वाले मरीजों को भी इस जाम का सामना करना पड़ रहा है।

 

गंभीर रूप से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने के लिए कड़ी मशक्कत का प्रयास करना पड़ रहा है।एक बुजुर्ग मरीज़ की पत्नी सुनंदा देवी ने बताया कि वह अपने पति को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आई थी। उनके पति को सास लेने में दिक्कत आ रही थी। क़रीब डेढ़ घंटे तक वह इस जानलेवा जाम में तपती धूप में फंसी रही। डेढ़ घंटे के लंबे इंतजार के बाद वह किसी तरह अपने पति को अस्पताल लेकर पहुंची।उनका कहना है कि जिला प्रशासन को जाम से मुक्ति के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए। क्योंकि इस रोड पर विभिन्न सरकारी विभाग और मेडिकल कॉलेज व अस्पताल मौजूद हैं। अगर समय रहते प्रशासन ने जाम से निजात दिलाने की कार्रवाई नहीं की तो किसी गंभीर रोगी की जान भी जा सकतीं हैं।अब देखना यह है कि क्या पुलिस और प्रशासन इससे निपटने के लिए गंभीरता दिखाता है, कछुआ चाल से वाहन को रेंगने देता है।

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